ज़िंदगी के किसी भी क्षेत्र में सफल होने कि प्रथम और अनिवार्य शर्त क्या है.

नमस्कार !

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आज बात करते है जिन्दगी में सफल होने की प्रथम और अनिवार्य शर्त क्या है या एक ऐसी चीज जिसे आत्मसात करने पे या सिखने पे जिन्दगी के सारे आयाम हासिल किये जा सकते है तो निःसंदेह इस कड़ी में चर्चा भगवान शिव का लाजमी हो जाता हैं तो आइये इसे भगवान शिव के जरिये आपको समझाने कि कोशिस करता हूँ आपने भगवान शिव कि प्रतिमा को कई बार देखा होगा पर आज शिव के प्रतिमा या चरित्र को मेरे दृष्टिकोण से देखने या समझने कि कोशिश कीजिये करण मैं इसका जिक्र जरा दुसरे तरीके से करना चाहता हु ताकि मैं आपको कुछ सफल जिन्दगी के राज के बारे में बता सकु जब हम भगवान शिव कि प्रतिमा का अबलोकन करते है तो हमारी नजर सबसे पहले भगवान शिव के जटा पे आसीन गंगा पे जाती है और ठीक जटा से थोरी निचे कि ओर देखे तो मस्तिस्क को पाते है जिस पर भगवन शिव की तीसरी आँख है जिसके खुलने मात्र से ज्बाला निकलती हैं यानी आग और ये सर्विदित है कि पानी और आग आपस में एक दुसरे के बिरोधी है एक दुसरे को काटने बाली प्रबृति है इनकी, पर शिव ने दोनों को धारण कर रखा है यदि हम पुनः जटा कि तरफ देखे तो वहा चाँद स्थित है और चाँद को अमृत कहा गया है और पुनः जटा से थोरा निचे आके गले को देखते हैं तो भगवान शिव के गले में विश है विश यानी जहर यहाँ फिर अमृत और बिश दोनों आपस में एक दुसरे को काटने बाले प्रबृति के है एक दुसरे के बिरोधी है पर शिव ने दोनों को धारण कर रखा है जब हम दूसरी बार गले की तरफ देखते हैं तो भगवन शिव के गले में साँप है और आप सबो को पता है उनके छोटे पुत्र श्री गणेश उनके पास ही रहते है जिनकी सवारी चूहा है आपने कही साँप और चूहा एक साथ नही देखे होगे पर शिव के साथ ये दोनों मस्त है आपस में किसी को किसी का डर या भय नहीं है और तो और शिव के बड़े पुत्र कार्तिक है वो भी उनके साथ ही रहते है और उनकी सवारी मोर है यहाँ फिर से गौर करने बाली बात है साँप और मोर भी एक दुसरे के बिरोधी है पर शिव के कारण दोनों साथ – साथ रहते है आपको पता ही होगा शिव कि सवारी नंदी हैं और माता पार्वती कि सवारी शेर, दुनिया में कही नंदी और शेर एक साथ आपको देखने को नहीं मिलेंगे क्योकि ये दोनों एक दुसरे को काटने बाली प्रजाति हैं दो विपरीत स्वभाव के है एक शाकाहारी तो दूसरा मांसहारी. भगवान शिव लगाते है भुभुत और उनके आस-पास रहता है भुत जो कि एक बार फिर से स्वभाववश एक दुसरे को काटने बाली रचना है यहाँ सोचने बाली बात यह है कि आग और पानी साथ साथ, जहर और अमृत साथ साथ, साँप और चूहा साथ साथ, साँप और मोर साथ साथ, शेर और नंदी साथ साथ, भुत और भभुत साथ साथ, जबकि ये आपस में एक दुसरे के बिरोधी है एक दुसरे को मार काटने बाले है लेकिन भगवान शिव इन सभी को धारण किये हुए और तनिक भी टेंशन में नही दीखते है यहाँ मैं जो कहना चाह रहा था वो ये कि जिन्दगी में आप चाहे अपना भविष्य किसि भी छेत्र में बनाये लेकिन जब तक आप दो विपरीत बिचारधारा बाले लोगो को दो विपरीत प्रबृति के समूहों को एक साथ लेके नहीं चलेंगे या लेके चलने नहीं आयेगा आप एक बड़ी सफलता हासिल नहीं कर पायेंगे जिन्दगी में सफल होने की प्रथम और अनिवार्य शर्त शायद यही है मुझे आसा ही नहीं पूर्ण बिश्वास है भगवान शिव से कुछ न कुछ आप हासिल करेंगे कुछ न कुछ आप सीखेंगे वक्त आ गया है इन चीजो को सीखते/सिखाते आपसे बिदा लेने का फिर आपके लिए एक नया BLOG लेके आऊंगा तब तक के लिए नमस्कार आपका दिन शुभ हो!



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